बहवेश व्यास के जीवन की सबसे कठिन घड़ियों में चेस उनकी एक शक्तिशाली गुंजाइश बन गई। 22 साल की उम्र में कैंसर के लड़ाई के दौरान उन्होंने चेस के माध्यम से आशा और संबल पाया। बचपन में खेल के प्रेमी बहवेश ने अपनी जीवन के हर चरण में चेस के साथ अपनी जड़ रखी। जब उनके जीवन के सामने अनिश्चितता आई तो चेस उनकी आत्मा के लिए एक संतुलित बिंदु बन गया। इस दौरान उन्होंने खेल के माध्यम से न केवल अपने आप को बचाया बल्कि